सासन प्रोजेक्ट को चीन और अमेरिकी बैंकों से फायनेंस की इजाजत नहीं

नगर प्रतिनिधि | जबलपुर
सिंगरौली में रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट को केन्द्र सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। कोयला मंत्रालय ने कंपनी के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, िजसमें प्रोजेक्ट के िलए चायना और अमेरिकन बैंकों से वित्तीय मदद लेने की अनुमति चाही गई थी।
हैरान करने वाला खुलासा हुआ है कि िरलायंस पावर ने िवदेशों से फायनेंस जुटाने के िलए कोल माइंस को ही मॉडगेज (बंधक) करने की तैयारी कर ली थी। कोल मिनिस्ट्री ने शक्ति भवन से सासन और मप्र सरकार के बीच हुए पॉवर परचेस एग्रीमेंट की शर्तों का बारीकी से मुआयना करने के बाद इस तरह की सख्ती दिखाई है। शेष | पेज 12
मंत्रालय ने रिलायंस और प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा है कि सासन प्रोजेक्ट के मोहेर और मोहेर अमरोही एक्सटेंशन ब्लॉक को किसी भी कीमत पर मॉडगेज बनाकर बैंक से ऋण हासिल नहीं किया जा सकता।
क्यों पड़ी जरूरत- िरलायंस पावर ने सासन प्रोजेक्ट के िलए अप्रैल 2009 में एसबीआई के नेतृत्व वाले 14 बैंकों के समूह से 14,500 करोड़ का लोन लिया। प्रोजेक्ट की कुल लागत 19,400 करोड़ के िलए 75 फीसदी िवत्तीय सहायता आईआईएफसीसी, पावर फायनेंस कॉर्पोरेशन, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन काॅर्पोरेशन, पीएनबी, एलआईसी, एक्सिस बैंक, आईडीबीआई, आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ने मुहैया कराई। िसतंबर 2011 में सासन प्रोजेक्ट को कोयला उपलब्ध कराने प्रदेश सरकार और रिलायंस पावर के बीच अनुबंध हो गया। सूत्रांे का कहना है कि इसके बाद किसी फायनेंसियल प्रॉफिट के मकसद से िरलायंस पावर ने बाद में फायनेंस रकम को यूएस एक्जिम, बैंक ऑफ चायना, चायना डेवलपमेंट और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ चायना से री-फायनेंस का प्रस्ताव रखा। बैंकों ने इस पर रजामंदी तो िदखाई, लेकिन माॅडगेज मांगा। वर्ष 2012 में रिलायंस पावर ने कोयला मंत्रालय से इसके िलए अनुमित मांगी। लंबी प्रक्रिया के बाद मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया।
िनयम में नहीं– कोल आवंटन नीति में स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट को मॉडगेज कर लोन लिया जा सकता है, लेकिन खदान को कतई नहीं। जानकारों के अनुसार मिनरल कन्सेशन रूल्स 1960 का िनयम 37 इस तरह की रियायत देता है, लेकिन मॉडगेज उन्हीं बैंकों में मुमकिन है, जो कोयला मंत्रालय के शैड्यूल बैंक सूची में शामिल हो।
इस मामले की मुझे जानकारी नहीं। इस बारे में हाल फिलहाल कुछ भी कह पाना मुमकिन नहीं है।
-एंटोनी डिसा, चीफ सेक्रेटरी, मप्र शासन
प्रदेश सरकार ने की वकालत

रिलायंस को फायदा पहुंचाने के िलए प्रदेश सरकार ने केन्द्र के आगे वकालत भी की। जानकारों का कहना है कि प्रदेश के खनन विभाग ने केन्द्रीय कोल मंत्रालय को पत्र भेजकर कहा कि इसके िलए अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। प्रदेश सरकार ने इसके लिए बाकायदा वह प्रक्रिया की, जसके जरिये यह संभव हो सकता है।

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