Another Bhopal? Sonbhadra-Singrauli has all the ingredients

AVESH TIWARI@PatrikaNews | 7 June 2016

Have you heard of the Sonbhadra-Singrauli belt? This region at the cusp of Uttar Pradesh, Chhattisgarh and Madhya Pradesh is billed by many as India’s energy capital. What nobody talks of is how this belt is on the brink of a disaster that can match the Bhopal disaster.Another Bhopal? Sonbhadra-Singrauli has all the ingredients

The methyl isocyanate leak at the Union Carbide plant in Bhopal led to India’s biggest industrial disaster on 2 December, 1984. Such was the scale of the leak that horror stories haven’t stop coming out three decades on. But have we learnt any lesson?

Doesn’t seem so if we look at Sonbhadra-Singrauli. The 40 square-kilometre area hosts some half-a-dozen power plants – both coal-fired and hydro-electric. Their combined capacity of about 21,000 megawatts (MW) cater to a large part of the country.

Now private groups such as Reliance, Lanco and Essar as well as state-owned utilities are set to add 20,000 MW more by setting up several projects in the next five years.

The belt also houses several other industries like an aluminum, chemical and carbon factories of the Birlas and a cement factory owned by the Jaypee Group.

But these impressive numbers tell just one side of the story.

The Sonbhadra-Singrauli belt is also known for the plight of its farmers whose land has been ruined by mining and limestone.

This region is also home to over five lakh Adivasis. In fact, Sonbhadra is the only district of Uttar Pradesh where tribals are in a majority.

However, the fruits of industrial activity have barely reached these people with most of them find it difficult to make ends meet.

The region is traversed by eight small rivers. With the area accounting for nearly 16% of the total carbon emission in the country, it is of little surprise that all the river waters are completely polluted.

In other words, every inch of this land is prone to a catastrophe like Bhopal. The greed of industrialists, politicians and bureaucrats is not the only reason for this risk.

The media is equally to blame for this state of affairs. It will highlight Sonbhadra-Singrauli’s issues only after a disaster. Otherwise, it is happy to look the other way.

Enrico Fabian for The Washington Post via Getty Images
The chloro chemicals division of Kanoria Chemicals & Industries Ltd, located at Renukoot, produces some of the most dangerous substances for industrial use. It was acquired by the Aditya Birla group in 2011 at a cost of Rs 830 crore.

It is estimated that the waste produced by this factory kills 40-50 people every year on average. Most of this waste is released directly into the Rihand dam. And the effect is telling on the surrounding population.

Thousands of residents in hundreds of villages around the Rihand Dam have been completely or partially crippled.

“Waste from the Kanoria Chemicals factory at Renukoot kills 40-50 people every year on an average”
In December 2011, 20 people of the Kamari Dand village in Sonbhadra district lost their lives after using the water from the Rihand Dam. Thousands of cattle had also met with the same fate.

Investigations proved that the chemicals released from the Kanoria Chemicals Factory had poisoned the water. Yet, the issue did not attract enough media attention.

Earlier, a gas leak from the Kanoria plant had killed five people in January 2005. The accident reportedly occurred because of the negligence of company officials.

Villages after village in Sonbhadra are falling prey to the fatal disease of Fluorosis, a chronic condition caused by excessive intake of fluorine compounds.

There is hardly a person in villages like Padwa Kodawari and Kusumha, who has not been afflicted with some of kind of physical deformity due to this disease.

The power plants of Sonbhadra-Singrauli emit 1.5 tonnes of fly ash every year. This fly ash is composed of mercury that is extremely harmful to the human body. Traces of mercury have been found in the samples of human hair, blood and even crops of this region.

The locals have no option but to live with the impact of this pollution. The sun here is paled with the dust coming out of towering chimneys. A blanket of haze engulfs the air as soon as the evening sets in.

The pollution has not even spared the still-to-be-born babies. The death of children during the pre-pregnancy period has become a regular occurrence.

Yet, the state-run Obra and Anpara power plants are operating without any environmental clearance. The Central Pollution Control Board has ordered a close down stating they are ‘too dangerous.’

“State-run Obra and Anpara power plants are operating without environmental clearance”
However, nobody seems baffled with such blatant flouting of norms. The seeds of a Bhopal-like tragedy are being sown, not only in Sonbhadra-Singrauli belt but in every corner of the country.

The state as well as the Union Government is avoiding accountability in the name of development. For now, the Sonbhadra-Singrauli region is nothing more than a hen laying golden eggs for them.

While one Warren Anderson may have gotten away, there are many more in the making.


सासन प्रोजेक्ट को चीन और अमेरिकी बैंकों से फायनेंस की इजाजत नहीं

नगर प्रतिनिधि | जबलपुर
सिंगरौली में रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट को केन्द्र सरकार ने तगड़ा झटका दिया है। कोयला मंत्रालय ने कंपनी के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, िजसमें प्रोजेक्ट के िलए चायना और अमेरिकन बैंकों से वित्तीय मदद लेने की अनुमति चाही गई थी।
हैरान करने वाला खुलासा हुआ है कि िरलायंस पावर ने िवदेशों से फायनेंस जुटाने के िलए कोल माइंस को ही मॉडगेज (बंधक) करने की तैयारी कर ली थी। कोल मिनिस्ट्री ने शक्ति भवन से सासन और मप्र सरकार के बीच हुए पॉवर परचेस एग्रीमेंट की शर्तों का बारीकी से मुआयना करने के बाद इस तरह की सख्ती दिखाई है। शेष | पेज 12
मंत्रालय ने रिलायंस और प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा है कि सासन प्रोजेक्ट के मोहेर और मोहेर अमरोही एक्सटेंशन ब्लॉक को किसी भी कीमत पर मॉडगेज बनाकर बैंक से ऋण हासिल नहीं किया जा सकता।
क्यों पड़ी जरूरत- िरलायंस पावर ने सासन प्रोजेक्ट के िलए अप्रैल 2009 में एसबीआई के नेतृत्व वाले 14 बैंकों के समूह से 14,500 करोड़ का लोन लिया। प्रोजेक्ट की कुल लागत 19,400 करोड़ के िलए 75 फीसदी िवत्तीय सहायता आईआईएफसीसी, पावर फायनेंस कॉर्पोरेशन, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन काॅर्पोरेशन, पीएनबी, एलआईसी, एक्सिस बैंक, आईडीबीआई, आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ने मुहैया कराई। िसतंबर 2011 में सासन प्रोजेक्ट को कोयला उपलब्ध कराने प्रदेश सरकार और रिलायंस पावर के बीच अनुबंध हो गया। सूत्रांे का कहना है कि इसके बाद किसी फायनेंसियल प्रॉफिट के मकसद से िरलायंस पावर ने बाद में फायनेंस रकम को यूएस एक्जिम, बैंक ऑफ चायना, चायना डेवलपमेंट और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक ऑफ चायना से री-फायनेंस का प्रस्ताव रखा। बैंकों ने इस पर रजामंदी तो िदखाई, लेकिन माॅडगेज मांगा। वर्ष 2012 में रिलायंस पावर ने कोयला मंत्रालय से इसके िलए अनुमित मांगी। लंबी प्रक्रिया के बाद मंत्रालय ने इसे खारिज कर दिया।
िनयम में नहीं– कोल आवंटन नीति में स्पष्ट है कि प्रोजेक्ट को मॉडगेज कर लोन लिया जा सकता है, लेकिन खदान को कतई नहीं। जानकारों के अनुसार मिनरल कन्सेशन रूल्स 1960 का िनयम 37 इस तरह की रियायत देता है, लेकिन मॉडगेज उन्हीं बैंकों में मुमकिन है, जो कोयला मंत्रालय के शैड्यूल बैंक सूची में शामिल हो।
इस मामले की मुझे जानकारी नहीं। इस बारे में हाल फिलहाल कुछ भी कह पाना मुमकिन नहीं है।
-एंटोनी डिसा, चीफ सेक्रेटरी, मप्र शासन
प्रदेश सरकार ने की वकालत

रिलायंस को फायदा पहुंचाने के िलए प्रदेश सरकार ने केन्द्र के आगे वकालत भी की। जानकारों का कहना है कि प्रदेश के खनन विभाग ने केन्द्रीय कोल मंत्रालय को पत्र भेजकर कहा कि इसके िलए अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। प्रदेश सरकार ने इसके लिए बाकायदा वह प्रक्रिया की, जसके जरिये यह संभव हो सकता है।

रिलायंस पॉवर में 19 श्रमिक मरे, सैकड़ों हुए घायल : रिपोर्ट

Bhaskar News
Apr 20, 2016,

जबलपुर. रिलायंस के सासन (सिंगरौली) अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट में निर्माण के दौरान 19 श्रमिकों की मौत व सैकड़ों के घायल होने का मामला सामने आया है। यह चौंकाने वाला खुलासा यूएस के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (एग्जिम) बैंक के इंस्पेक्टर जनरल ने किया है। ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल (ओआईजी) की रिपोर्ट में सासन पावर में श्रमिकों की सुरक्षा में कोताही व उनके अधिकारों से खिलवाड़ की बात उजागर करते हुए इस बात पर चिंता जताई गई है कि इतना सब होने के बावजूद न तो प्रबंधन चेत रहा और न किसी भी स्तर पर पीडि़तों की सुनी जा रही है।

हालात बिगड़ रहे :
सासन परियोजना क्षेत्र में हो रहे हादसों के मुद्दों को लगातार उठाती आ रही सृजन लोकहित समिति की शिकायत पर बैंक का जांच दल भारत आया था। दल की रिपोर्र्ट के बाद बैंक के ओआईजी ने यह माना कि बार-बार आगाह किए जाने के बावजूद सासन में हालात बिगड़ रहे हैं। यह चिंता भी जताई कि बैंक की ओर से कोई भी मजबूत कदम इन घटनाओं की जांच के लिए नहीं उठाया गया। जैसा ओआईजी कहते हैं- अगर समय पर कोई कदम उठाया होता तो शायद कुछ लोगों का जीवन बच गया होता।

ज्यादा हो सकती है मृतकों की संख्या

श्रमिकों की मौतों का आंकड़ा 19 से ज्यादा होने की आशंका भी जताई गई है। ओआईजी की रिपोर्ट के मुताबिक- यहां ज्यादातर श्रमिक दैनिक वेतनभोगी ही हैं, जिनका सही तरीके से दस्तावेजीकरण नहीं किया जाता। मृत्यु के अलावा भी ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई हैं जिसमें श्रमिक बुरी तरह घायल हुए हैं और कुछ तो पूरे जीवन के लिए ही विकलांग हो चुके हैं। इन मामलों में शिकायत इसलिए दर्ज नहीं हुई क्योंकि अधिकांश श्रमिक बाहरी हैं और उन पर ठेकेदार सहित कंपनी का दबाव रहता है।

आवाज उठाई तो कर दिया बाहर :

नागरिक समाज संस्थाओं के साथ मिलकर जुलाई 2014 में यूएस एग्जिम बैंक में सासन पावर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली सृजन लोकहित समिति के सदस्य सती प्रसाद के मुताबिक- श्रमिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने और उनको संगठित करने के कारण कंपनी ने उन्हें झूठे केस में फंसाकर बाहर कर दिया था। सती प्रसाद- परियोजना क्षेत्र में कई गंभीर घटनाएं होने और उसमें मृतकों व घायलों की संख्या कई सैकड़ों में होने की बात भी अपनी शिकायत में कहते हैं।
यह है मांग

सृजन लोकहित समिति ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इन गंभीर दुर्घटनाओं पर नजर रखे और तुरन्त एक जांच समिति गठित करे। जांच समिति की पूरी रिपोर्ट आने तथा मृतकों और घायलों को पूर्ण मुआवजा मिलने तक एग्जिम बैंक भी सासन प्रोजेक्ट की कोई वित्तीय सहायता न करे, यह मांग की गई है। समिति ने राज्य शासन से जांच पूरी होने व उचित सुरक्षा उपाय बहाल होने तक यहां कामकाज बंद कराए जाने की भी मांग की है।
न शिकायत न कार्रवाई

रिलायंस सासन के इस एक बड़े वित्तदाता बैंक के चेयरमैन ने कंपनी सीईओ को पत्र लिखते हुए अमानक स्तर के सुरक्षा उपाय अपनाए जाने पर नाराजगी जताते हुए एकीकृत परियोजना क्षेत्र में हुई 19 मौतों को दुखद बताया। यही नहीं इस तरह की घटनाएं रोकने कंपनी से वर्किंग रिपोर्ट फरवरी 2016 तक पेश करने के लिए कहा था । सूत्रों के मुताबिक- अभी तक बैंक के चेयरमैन को न तो वह रिपोर्ट मिली और न परियोजना क्षेत्र में कोई बदलाव आया।

US Ex- Im Bank confirms serious labour rights violations at Reliance’s Sasan Power Project

Press Statement
Singrauli | Feb 9, 2016

US Ex- Im Bank confirms serious labour rights violations at Reliance’s Sasan Power Project

Export Import Bank of the United States, a financer of Reliance’s Sasan Power Project in Madhya Pradesh, confirmed serious labour rights violations at the project, including 19 deaths.

In the report “Report on Project Financing of Sasan Power Limited” dated September 2015,the Office of Inspector General of the US ExIm bank, it has been confirmed that Ex-Im Bank’s Chairman expressed his continued disappointment to the CEO of Reliance regarding the “poor safety” practices at the Project. In particular, the Chairman’s letter stated, “the number of all fatalities at the integrated Project is now 19—which is both tragic and absolutely unacceptable.” Despite that, nothing changed on the ground.

Most of these cases were not investigated, nor action taken against the Reliance for this serious lapses. Ex-Im Bank, despite expressing concerns about these cases, failed to take any action to ensure that such cases do not recur.

SrijanLokhitSamiti (SLS) has been raising issues of ‘accident deaths’ at the project site the past few years. This is the first time this is recognised by a body like that of Ex-Im Bank. “19 deaths are very serious. What is equally shocking is that despite these cases, no action is taken against the company. The impunity the company continues to enjoy is very disturbing’, Awadhesh Kumar, senior activist of SrijanLokhitSamiti said.

The report further says that, “The letter emphasized the Bank’s commitment to ‘the highest standards for health and safety compliance in projects financed by Ex-Im Bank’ and that ‘the alarming number of injuries and fatalities must come to an end.’ The Chairman’s letter noted that ‘rather than improving, the situation appears to be deteriorating.’ “ The Bank required Reliance to submit “detailed action plans to improve the health and safety record at the Project sites by February 15, 2015.”

The report confirms that the incidents of fatalities have been brought to the notice of the Ex-ImBank by third parties since 2012 and the only action that the was recommended from the Banks side was to ‘develop a safety oriented culture’. However, no substantial actions were taken by the Ex-Im Bank to out a check to these cases. Timely actions could have saved many lives.

“The number of deaths could be many times more than 19. Most of the labourers are contract labourers and what happens to them is not documented properly. Apart from deaths, there are umpteen number of cases where labourers are seriously injured, some even impaired for life. They are not counted here and their issues are not addressed,” xxxx, (also say who s/he is) said.

In a complaint sent to US Ex-Im Bank in July 2014 submitted by SrijanLokhitSamitialong with other civil society organisations, it was categorically mentioned that there have been a number of serious accidents cases at the project site and the numbers may run into hundreds. Locals have also complained of all such accidents not being reported especially in cases where migrant labour is involved.

We atSrijianLokhitSamiti demand that the Government of Madhya Pradesh should take a serious note of these accident cases and commission an enquiry into these fatal accidents. Until the enquiry is complete and appropriate safety measures are taken, the project should be shut down.

We also demand US Ex-Im Bank to take liability for financing the project, which has become a death trap for labourers working at the project site. The Bank should make no further disbursement for the project, until it ensures proper safety standards for it.

Full report “Report on Project Financing of Sasan Power Limited”:

Response of SLS to the report:

Awadheshbhai: Tel:09425013524

रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट मे गंभीर श्रमिक आधिकारों का उल्लधंनः यूएस एग्जिम बैंक की जाॅच दल ने की पुष्टि

प्रेस विज्ञप्ती
सिगरौली फरवरी 9, 2016

रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट मे गंभीर श्रमिक आधिकारों का उल्लधंनः यूएस एग्जिम बैंक की जाॅच दल ने की पुष्टि
अब तक हुई 19 मौते और अनेक घायल, कोई कार्यवाही नही।

यूनाईटेड स्टेट की एक्सर्पोट इम्र्पोट बैंक रिलायंस के सासन पावर परियोजना मध्यप्रदेष मे एक वित्तदाता है जिसने परियोजना क्षेत्र मे निमार्ण कार्य के दौरान 19 मृत्यु और गंभीर श्रमिक आधिकारों के उल्लधंन की पुष्टि की।

यूएस एग्जिम बैंक की रिपोर्ट ”प्रोजेक्ट फाइनेन्स आॅफ सासन लिमिटेड“ सितंबर 2015 मे यूएस एग्जिम बैंक के इंस्पेक्टर जनरल आफीस द्वारा यह पुष्टि की गई कि यूएस एग्जिम बैंक चैयरमेन ने सीईओ रिलायंस को सूचना दी कि वे परियोजना मे लगातार खराब सुरक्षा उपाय बरतने से नाखुष है। विषेषतौर पर चैयरमेन के पत्र मे यह लिखा है कि “एकीकृत परियोजना क्षेत्र मे अभी तक कुल मृत्यु की घटनाये 19 हो चुकी है जो दुखद और अमान्य है।“ उसके बावजूद परियोजना क्षेत्र मे कोई भी बदलाव नही आया।
ज्यादातर इन घटनाओं मे ना तो कोई जाॅच हुई है ना ही इन गंभीर घटना के तहत रिलायंस के खिलाफ कोई षिकायत दर्ज है। इन घटनाओं को एग्जिम बैंक द्रवारा बताये जाने के बावजूद परियोजना इस तरह की घटनाओ को रोकने हेतु कोई कदम नही उठाया जा रहा है कम्पनी ऐसी घटनाओं को रोकने मे नाकाम साबित हो रही है।

पिछले कुछ वर्षो से सृजन लोकहीत समिती सासन परियोजना क्षेत्र मे हो रही घटनाओं के मुद्दो को लगातार उठा रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि ऐसी घटनाओं को यूएस एग्जिम बैंक जैसी संस्था ने भी माना है। 19 मृत्यु होना अपने आप मे गंभीर है। उससे भी षर्मनाक यह है कि इन दुर्घटनाओं के बावजूद कम्पनी के खिलाफ अभी तक कोई कदम नही उठाया गया। इस छुटकारे का कम्ंपनी लगातार फायदा उठा रही है यह उससे भी ज्यादा निराषाजनक है।

रिर्पोट आगे कहता कि “सुरक्षा और स्वास्थ्य आनुपालन के सर्वोच्च मापदंड को यूएस एग्जिम बैंक के द्वारा परियोजना फाइनेन्ष“ और खतरनाक घटनाओं और दुर्घटनाऐ का अंत होना चाहिये, इसके प्रति पत्र मे बैक की प्रतिबद्धता पर बल दिया गया है। चेयरमेन के पत्र मे लिखा है कि परिस्थितियों मे सुधार आने की बजाय और बिगडती जा रही है। ”परियोजना क्षेत्र मे सुरक्षा और स्वास्थ्य उपायो के बारे मे एक विस्तृत कार्यक्रम योजना 15 फरवरी 2016 तक” बैंक ने रिलायंस से जमा करने को कहा है।

रिर्पोट ने माना है कि 2012 से कोई तीसरा पक्ष यूएस एग्जिम बैंक को इन मृत्यू की घटनाओं के बारे मे बता रहा था और उस पर “एक सुरक्षा केद्रित संस्कृति के बनाने के लिये“ बैंक ने अनुरोध किया था। हालाॅकि कोई भी मजूबत कदम यूएस एग्जिम बैंक की ओर से इन घटनाओं की जाॅच के लिये नही उठाया गया। अगर समय पर कोई कदम उठाया होता तो षायद कुछ लोगो का जीवन बच गया होता।

”मुृत्यू की संख्या 19 से कई ज्यादा हो सकती है क्योकि ज्यादातर श्रमिक दैनिक वेतनभोगी ही है उनको कोई भी ठीक से दस्तावेजीकरण नही किया जाता। मृत्यू के आलावा ऐसे कई दुर्घटनाये हुई है जिसमे श्रमिक बुरी तरह घायल हुये है और कुछ तो पूरे जीवन के लिये ही विकलांग हो चुके है। उनकी घटनाओं को यहा नही गिना गया ना ही उनके मुद्रदों पर विचार किया गया।” ऐसा सतीप्रसाद, सृजनलोकहीत समिति के सदस्य का कहना है। (सतिप्रसाद को श्रमिको के आधिकारो के लिये आवाज उठाने और उनको सगंठीत करने के कारण कम्पनी ने झुठे केस मे फसाकर, बाहर कर दिया था।)

सृजन लोकहीत समिति ने अन्य नागरिक समाज संस्थाओं के साथ मिलकर जुलाई 2014 मे यूएस एग्जिम बैंक मे एक षिकायत दर्ज की, उसमे स्पष्टरूप से लिखा था कि परियोजना क्षेत्र मे कई गंभीर घटनाये हो चुकी है और वो कई संख्या कई सैकडों मे बदल सकती है। स्थानीय लोगो ने भी षिकायत की है कि ऐसी घटनाये कही भी दर्ज नही हो रही है और विषेषरूप ऐसा प्रवासी श्रमिको के साथ ज्यादा हो रहा है।

हम सृजन लोकहीत समिती की ओर से माॅग करते है कि मध्यप्रदेष सरकार इन गंभीर दुर्घटनाओं पर नजर रखे और तुरंत एक जाॅच समिती गठित करे और जाॅच समिति की पूरी रिर्पोट आने तक मृतको और घायलो को पूर्ण मुआवजा मिलने तक कोई वित्तीय सहायता ना करे। मध्यप्रदेष षासन से हम माॅग करते है कि सासन कंपनी मे जाॅच पूरी होने तक उचित सुरक्षा उपाय बहाल होने तक कंपनी को फौरन बंद किया जाऐ। हम यूएस एग्जिम बैंकसे माॅग करते है कि वह परियोजना फाइनेन्स करने के लिये जिम्मदारी ले जो वहा काम करने वाले श्रमिको के लिये यह परियोजना मौत का फंदा बन गया है।

सृजन लोकहीत समिती,
65 षिवाजी काम्पेलेक्स, नवजीवन विहार
विध्यानगर, सिगरौली
आवधेष कुमारः 09425013524

Full report “Report on Project Financing of Sasan Power Limited”:

Response of SLS to the report:

Srijan Lokhit Samiti Reponse to the report on Sasan of OIG ExIm Bank

This is a response to the report on Sasan Power Limited of Office of Inspector General of the Export-Import Bank of the United States by Srijan Likhit Samiti along with other national and international organizations. SLS has demanded that the case is to be re-investigated. Since OIG does not have the expertise or capacity, an independent team should be formed, with experts recommended by both Ex-Im and NGOs and a time-bound enquiry be held.

Response to OIG Sasan Report – December 2015