मोरवा से 50 हजार लोग होंगे विस्थापित

राजपत्र में प्रकाशन के साथ तमाम अटकलों पर लगा विराम
केन्द्र सरकार ने मोरवा सहित 10 गांवों की जमीन अधिग्रहित करने मंजूरी दी
47 सौ एकड़ से ज्यादा भूमि पर कब्जा करेगा एनसीएल

इस क्षेत्र में होगा भू-अर्जन
ग्राम पटवारी सर्किल संख्या क्षेत्र हेक्टेयर में
चटका              29               42
झिंगुरदह          29             507
चूरीदह            29                9
गोरबी              92             10.3
कठास            92              3.54
कुसवई           29               0.52
मेढौली             28            638.3
पंजरेह              29            558
चटका             29             127
झिंगुरदह         29             30
कुल- 1925.66 हेक्टेयर
यह भी उल्लेख- केन्द्रीय सरकार को यह प्रतीत होता है कि अनुसूची में उल्लेखित परिक्षेत्र की भूमि में कोयला अभिप्राप्त किए जाने की संभावना है जिसके लिए महाप्रबंधक राजस्व, पुनर्वास और पुनस्र्थापन, एनसीएल सिंगरौली के कार्यालय अथवा महाप्रबंधक अथवा जिला कलेक्टर सिंगरौली के कार्यालय में किया जा सकता है।

अभी तक ऐसा समझा जा रहा था कि एनसीएल कभी भी मोरवा को कोयला निकालने के लिए खाली नहीं कराएगा। हजारों लोगों का विस्थापन और उनकी पुर्नबसाहट कोई आसान काम नहीं है। लेकिन, ऐसी तमाम अटकलों पर केन्द्र सरकार ने विराम लगाते हुए मोरवा सहित आसपास के 10 गांवों की जमीन अधिग्रहीत करने धारा 4 का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। इसके साथ ही 50 हजार से ज्यादा लोगों का उजड़ना तय हो गया है। संभवत: यह देश का अब तक का सबसे बड़ा विस्थापन होगा। मेढ़ौली के मुददे पर एनसीएल से नाराज चल रहे विस्थापितों का साथ देने मोरवा के लोग पहले ही सड़कों पर उतर चुके हैं लेकिन अब केन्द्र की अधिसूचना के बाद उनका क्या रुख होगा, ये आने वाला समय बताएगा। उल्लेखनीय है कि दैनिक भास्कर से चर्चा के दौरान अगस्त माह में ही एनसीएल सीएमडी टीके नाग ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि मोरवा के अधिग्रहण की दिशा में जल्द प्रक्रिया शुरू हो सकती है। एनसीएल की जयंत, ककरी और दुधिचुआ कोल परियोजनाओं के विस्तार के लिए कोयला मंत्रालय की ओर से भारत सरकार ने असाधारण अधिसूचना का प्रकाशन कर दिया है। यह अधिसूचना एनसीएल मुख्यालय के 16 मार्च को लिखे गये पत्र के आधार पर 4 मई को लागू की गई है।

इस अधिसूचना के जारी होने के बाद मोरवा सहित आस पास के दस गांवों से कोयला निकालने के लिए भू- अर्जन की प्रक्रिया के लिए पहला कदम बढ़ा दिया गया है। इस अधिसूचना के साथ ही कहा गया है कि संबंधित हितबद्ध कोई भी व्यक्ति जो भी इस भूमि या उसके किसी भाग के ऊपर अपना आक्षेप रखता हो अथवा अर्जित भूमि में कि सी प्रकार की नुकसान की संभावना के लिए प्रतिकर का दावा कर सकता है। आपत्ति करने वाले व्यक्ति को 90 दिनों के भीतर महाप्रबंधक राजस्व, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन एनसीएल सिंगरौली के पास अपना आवेदन देना होगा। इस अधिसूचना को जारी करते हुए अधिसूचना में दो अनुसूची भी संलग्र की गई है जिसमें भूमि के अर्जन का उद्देश्य और उसकी सीमा रेखा का उल्लेख भी किया गया है। साथ अर्जन के मद आने वाली भूूमि का क्षेत्रफल पटवारी सर्किल व गांवों के नाम भी दर्शाये गये हैं। साथ ही गांवों की सीमा को बताते हुए उनके अधीनस्थ अर्जित की जाने वाली जमीन का भी उल्लेख किया गया है।

http://epaper.bhaskar.com/detail/?id=1009496&boxid=53121744754&view=text&editioncode=180&pagedate=05/31/2016&pageno=9&map=map&ch=mpcg

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