देहरादून में गूंजा रिलायंस का सासन पॉवर प्रोजेक्ट घोटाला

Bhaskar News Apr 27, 2016, 06:13 AM IST

देहरादून में गूंजा रिलायंस का सासन पॉवर प्रोजेक्ट घोटाला

रिलायंस पॉवर ने सिर्फ एक दिन प्लांट चलाकर कमाया साल भर का मुनाफा

Bhaskar News
Apr 18, 2016, 07:33 AM IST

जबलपुर. एक दिन के प्रोडक्शन की कहानी मप्र मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी सहित डब्ल्यूआरएलडीसी (वेस्टर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर) से जुड़े सभी 14 पॉवर परचेसर पर उल्टी पड़ गई है। इन्हें महज एक दिन की कीमत 1050 करोड़ रुपए रिलायंस पॉवर (सासन) को दे कर चुकानी होगी। एमपीपीएमसी जिसकी करीब 37.5 प्रतिशत खरीदी भागीदारी है, पर करीब 378 करोड़ रुपए का भार आएगा।

रिलायंस द्वारा रिलायंस पॉवर के 3960 मेगावाट वाले सासन अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट ने अनुबंध की शर्तों में वर्णित वित्तीय वर्ष के फेर में फंसा कर बिजली खरीददारों को 31 मार्च 2013 को, महज एक दिन 70 पैसे यूनिट की दर पर बिजली दी और पूरे साल का लाभ ले लिया। शर्तों के मुताबिक 1.31 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी का जो टैरिफ तीसरे साल यानी 2015-16 में लागू होना था वह एक अप्रैल 2014-15 में ही लागू हो गया। और रिलायंस ने एक दिन में 1050 करोड़ कमा डाले।
एप्टेल में हारे : पहले ही वित्त वर्ष 2013-14 के पहले दिन से शुरू हुए एक दिन के इस विवाद को लेकर डब्ल्यूआरएलडीसी मेम्बर्स ने लंबी लड़ाई लड़ी। सीईआरसी (सेन्ट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलरटी कमीशन) ने मप्र पॉवर मैनेजमेंट कं. के तकनीकी दावों को सही माना और कॉमर्शियल ऑपरेशन डेट (सीओडी) 16 अगस्त 2013 मान्य की। एक नहीं दो-दो बार रिलायंस के दावे सीईआरसी में खारिज हुए लेकिन अंत में एप्टेल (अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी) ने रिलायंस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सीओडी 31 मार्च 13 फाइनल कर दी।
फिर लगा झटका
सस्ती बिजली के रिलायंस के वादे की भूल-भुलैयों में खोई मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को रिलायंस की ओर से यह दूसरा झटका हैे। दो सप्ताह पहले 31 मार्च 16 को अपीलेट द्वारा जारी फैसले के मद्देनजर एमपीपीएमसी को रिलायंस को अब वह 378 करोड़ रुपए चुकाने होंगे जिसका हित-लाभ कभी मप्र को मिला ही नहीं। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस की ओर से मप्र को लगातार मिल रहे वित्तीय झटकों की बदौलत मप्र पॉवर मैनेजमेंट कंपनी पर करीब साढ़े छह सौ करोड़ का भार पड़ेगा।

अनुबंध के कमजोर पहलुओं का मिला लाभ
मप्र विद्युत अभियंता संघ के महासचिव व्ही.के. एस परिहार और संयुक्त सचिव अनुराग नायक कहते हैं- रिलायंस ने अनुबंध की शर्तों के सभी कमजोर पहलुओं का पूरा-पूरा लाभ उठाया। अनुबंध में बजाय साल का जिक्र करने वित्तीय वर्ष का जिक्र किया और रिलायंस ने केवल एक दिन डिप लोड पर प्लांट चला कर, अपनी एक साल की दावेदारी पुख्ता कर ली। सीईआरसी एक तरह से तकनीकी संंस्था है इसलिए वहां रिलायंस दो-दो बार हारा, लेकिन प्रशासनिक अभिकरण एप्टेल में एमपीपीएमसी हार गया।

सरकार को सुप्रीम कोर्ट में जाना ही चाहिए, क्योंकि यह एक बड़ा मामला है। बिना साल भर हित-लाभ दिए , कोई कैसे एक दिन में पूरे साल का लाभ उठा सकता है। फैसला दो सप्ताह पहले ही हुआ है। केस का अध्ययन चल रहा है। जल्द ही विवेचना उपरांत अभिमत एमडी को भेज दिया जाएगा। अंतिम फैसला वहीं होगा।
के.के. अग्रवाल, सीजीएम (रेग्यूलरटी), एमपीपीएमसी

http://www.bhaskar.com/news/MP-JBL-OMC-reliance-power-plant-by-running-just-one-day-a-year-earned-profits-5302483-NOR.html

 

रिलायंस पॉवर में 19 श्रमिक मरे, सैकड़ों हुए घायल : रिपोर्ट

Bhaskar News
Apr 20, 2016,

जबलपुर. रिलायंस के सासन (सिंगरौली) अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट में निर्माण के दौरान 19 श्रमिकों की मौत व सैकड़ों के घायल होने का मामला सामने आया है। यह चौंकाने वाला खुलासा यूएस के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट (एग्जिम) बैंक के इंस्पेक्टर जनरल ने किया है। ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल (ओआईजी) की रिपोर्ट में सासन पावर में श्रमिकों की सुरक्षा में कोताही व उनके अधिकारों से खिलवाड़ की बात उजागर करते हुए इस बात पर चिंता जताई गई है कि इतना सब होने के बावजूद न तो प्रबंधन चेत रहा और न किसी भी स्तर पर पीडि़तों की सुनी जा रही है।

हालात बिगड़ रहे :
सासन परियोजना क्षेत्र में हो रहे हादसों के मुद्दों को लगातार उठाती आ रही सृजन लोकहित समिति की शिकायत पर बैंक का जांच दल भारत आया था। दल की रिपोर्र्ट के बाद बैंक के ओआईजी ने यह माना कि बार-बार आगाह किए जाने के बावजूद सासन में हालात बिगड़ रहे हैं। यह चिंता भी जताई कि बैंक की ओर से कोई भी मजबूत कदम इन घटनाओं की जांच के लिए नहीं उठाया गया। जैसा ओआईजी कहते हैं- अगर समय पर कोई कदम उठाया होता तो शायद कुछ लोगों का जीवन बच गया होता।

ज्यादा हो सकती है मृतकों की संख्या

श्रमिकों की मौतों का आंकड़ा 19 से ज्यादा होने की आशंका भी जताई गई है। ओआईजी की रिपोर्ट के मुताबिक- यहां ज्यादातर श्रमिक दैनिक वेतनभोगी ही हैं, जिनका सही तरीके से दस्तावेजीकरण नहीं किया जाता। मृत्यु के अलावा भी ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई हैं जिसमें श्रमिक बुरी तरह घायल हुए हैं और कुछ तो पूरे जीवन के लिए ही विकलांग हो चुके हैं। इन मामलों में शिकायत इसलिए दर्ज नहीं हुई क्योंकि अधिकांश श्रमिक बाहरी हैं और उन पर ठेकेदार सहित कंपनी का दबाव रहता है।

आवाज उठाई तो कर दिया बाहर :

नागरिक समाज संस्थाओं के साथ मिलकर जुलाई 2014 में यूएस एग्जिम बैंक में सासन पावर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली सृजन लोकहित समिति के सदस्य सती प्रसाद के मुताबिक- श्रमिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने और उनको संगठित करने के कारण कंपनी ने उन्हें झूठे केस में फंसाकर बाहर कर दिया था। सती प्रसाद- परियोजना क्षेत्र में कई गंभीर घटनाएं होने और उसमें मृतकों व घायलों की संख्या कई सैकड़ों में होने की बात भी अपनी शिकायत में कहते हैं।
यह है मांग

सृजन लोकहित समिति ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि वह इन गंभीर दुर्घटनाओं पर नजर रखे और तुरन्त एक जांच समिति गठित करे। जांच समिति की पूरी रिपोर्ट आने तथा मृतकों और घायलों को पूर्ण मुआवजा मिलने तक एग्जिम बैंक भी सासन प्रोजेक्ट की कोई वित्तीय सहायता न करे, यह मांग की गई है। समिति ने राज्य शासन से जांच पूरी होने व उचित सुरक्षा उपाय बहाल होने तक यहां कामकाज बंद कराए जाने की भी मांग की है।
न शिकायत न कार्रवाई

रिलायंस सासन के इस एक बड़े वित्तदाता बैंक के चेयरमैन ने कंपनी सीईओ को पत्र लिखते हुए अमानक स्तर के सुरक्षा उपाय अपनाए जाने पर नाराजगी जताते हुए एकीकृत परियोजना क्षेत्र में हुई 19 मौतों को दुखद बताया। यही नहीं इस तरह की घटनाएं रोकने कंपनी से वर्किंग रिपोर्ट फरवरी 2016 तक पेश करने के लिए कहा था । सूत्रों के मुताबिक- अभी तक बैंक के चेयरमैन को न तो वह रिपोर्ट मिली और न परियोजना क्षेत्र में कोई बदलाव आया।

http://www.bhaskar.com/news/MP-JBL-OMC-19-worker-dead-in-reliance-power-5304173-NOR.html