35 साल पहले विस्थापित निषक्तः रामसुभग आज भी भटकने को मजबूर

 

पिछले 35 वर्षो से विष्व बैक परियोजना से विस्थापित दरबदर भटक रहे है
सिगरौली को भारत की ऊर्जा राजधानी बनाने की षुरूआत करीब चार दषक पहले सन् 1977 मे एनटीपीसी ने एक विद्युत गृह को स्थापित कर किया गया था जिसके चलते हजारों लोग विस्थापित हुये थे उस दौरान सिगरौली एनटीपीसी विद्युत गृह को स्थापित करने हेतु भारत सरकार को पहली वित्तीय सहायता विष्व बैंक ने दी थी। उसके बाद सिगंरौली मे विद्युत गृहों और उससे सबंधित परियोजनाओ की बाढ आ गई। जिसके चलते लगभग दो से तीन लाख लोग विस्थापित हो चुके है।। उनमे से कई परिवार पिछले 35 वर्षो मे कम से कम तीन से पाॅच बार विस्थापित किये चुके है और विस्थापन अभी भी जारी है पिछले 35 वर्षो मे एक बार भी इन विस्थापितो की खबर ना तो राज्य सरकारों ने ली ना ही केंद्र सरकारो ने। ये परिवार दरबदर भटकने को मजबूर है। सिगरौली विद्युत गृह से विस्थापित लोग आज भी आपने प्लाट आबटन के लिये दरबदर भटक रहे है। हाॅलाकि विस्थापित परिवार ने लगातार निदेषक मानव ससाधन और तमात संबधित विभागों ये पत्राचार किया है। फिर भी कोई संतुष्ट जबाव विभागो की ओर अभी तक नही नही मिल पाया।

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उन विस्थापितों मे ही चिल्काडाॅड के रहले वाले निषक्त रामसुभगं षुक्ला का कहना है कि “मैं अधिकारियो के यहाॅ पत्र के जरियेे गुहार लगाते लगाते थक चुके है। मै एक विक्लांग व्यक्ति हुॅ चलने फिरने मे असमर्थ हूॅ। इसलिये उक्त भूखंड नही मिल पाया। अब मै हताष एव निराष होकर राजीवगाॅधी बाजार के पास दिनाॅक 17 फरवरी 2016 से धरने बैठा हॅू। मुझे प्लाट ना मिलने के कारण खुद ही सीमाकंन कर धरने पर बैठने के लिये मजबूर हो गया हूॅ। उनका कहना है कि उन्हे मकान के विस्थापन का 1200 रूपये मुआवजा दिया गया था किन्तु जमीन के बदले प्लाट आज तक नही मिला है। बार बार ध्यान आकृष्ट कराने के उपरांत भी प्रबंधन द्धारा महज आष्वासन की घुटटी ही पिलाई जा रही है। आगे वे कहते है कि उनके पिता व भाई को प्लाट दे दिया गया है लेकिन अभी तक उनको प्लाट का आबटन नही किया गया है।“

कई परिवारो को प्लाट का आबंटन हो चुका है लेकिन उस प्लाट की जगह पर पहले से ही कोई ओर काबिज है इसलिये लोगो को दरबदर भटकने के लिये मजबूर है। रामसुभग षुक्ला प्लाट हेतु धरने पर बैठे है ऐसा सुनकर कोटा के रहवासी जगन्नाथ गिरी सहित कई अन्य परिवार जिनको प्लाट का आबंटन नही हुआ है वे रामसुभग षुक्ला के साथ धरना स्थल आपनी आवाज बुलंद करने षामिल हुये।
भारत की इस ऊर्जा राजधानी सिगरौली ने पिछले चार दषकों मे ऐसे अनगिनत रामसुभग षुक्ला बनाये और हर रोज कई रामसुभग बानये जा रहे है लेकिन वे आपनी आवाज बुलंद करने मे समर्थ नही है या रामसुभग जैसा कुछ पत्राचार कर पाये या आपनी आवाज बुलंद कर पाये।
विद्युत परियोजना के नगर प्रषासन आधिकारी गौतम सिह भाटी, सेक्षन आफिसर वाइके चर्तुवेदी सहित अन्य अधिकारी हमसे मिले लेकिन कोई ठोस परिणाम नही निकला। इसलिये मै मध्यप्रदेष सरकार और केंद्र सरकार से माॅग करते है कि हमे नियमानुसार प्लाट का आबटन करवाये और जिन लोगो का प्लाटों पर काबिज नही मिल पाया उनको काबिज फौरन करवाये। साथ ही हम विष्वबैंक से भी माॅग करते है कि वह परियोजना फाइनेन्स करने के लिये जिम्मेदारी ले और विस्थापितों को प्लाट आबटन हेतु सरकार का इस ओर ध्यान आकर्षित करवाये।